मंगलवार, 26 मार्च 2013

होळी...


                ..….होळी……

सावन का बाद आयो बसंत.... चारो तरफ हरियाली जs हरियाली की बहार. कामदेव नs फागुन की पागड़ी बांधी बसंत नs रथ सजायों- सिळगारियों रति भी पीच्छ क्यो रयती उन्न भी फूल नs सी सिळगार करयो. चारो तरफ  मद–मस्त हवा चलन मडी.......... कामदेव–रति का इना मदन महोत्सव मs सब मदहोश हुई गया काई तो नद्दीनाळा,काई पहाड़- झरना, हवा–पवन, धरती -आकास सभई प्रेम की परिसीमा सी परे उन्मुक्त गगन मs उड़न  खs तैय्यार धरती-आकास सी मिलण खs आतुर तो झरनों पहाड़ सी मिलण खs बैचेन तो नाद्दी-नाळा सागर सी... सभई बृज की गोपी नs की तरह प्रेम मs आसक्त   असीम उन्मुक्त प्रेम मs रंगेला जहा  हर कोई प्रेम सी सराबोर छे .... हर कोई कोईको होण खs तैयार.....प्रेम का इना होणा-होणी का होण को नाव छे होळी.......तो कवा होळी की खूब-खूब शुभ कामना     

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