बुधवार, 13 फ़रवरी 2013

पोरी


पोरी

टेसू फूली नहुई कुप्पो ,आम्बो भी हुयो घण -घुप्पो
खेत मs लगी रयाज घणा गिलकी, तुरया-तोरी
म्हारा गाँव का रंगीला छे धणी-लुगई,पोरया नs पोरी
धणी की साथ लुगाई नी  होय तो वात नी बणती
अनपोरया नs की साथ पोरी नी होय तो वात नी जचती क्योकि –----------

पोरइनघर की बहार, झाझर की झळकार छे
आँगणा की धुप खिलतो गुलाब छे
कच्ची रोटी को साथ, नानी-सी माय को नानो दुलार छे
 पोरी नी होय तो सुनो घर संसार छे..........................
सुनो छे आँग्णों,
सुनी झांझर- झळकार छे
सुना छे ढोल- नगाड़ा,
सुना व्रत- तिवार छे
सुनो छे नीम- तळय्या,
सुनी घर की सोन-चिरय्या,
सुनो घर-माथा को भाल छे
सुनो घर को चूलो-चवको,
सुनो घर को कोनो-कोनो
सुनी पाती-मनुहार छे
पोरी नी होय तो सुनो घर-संसार छे................................
पोरी सीता-सावित्री, गंगा सी नार छे
पोरी गोदी को बाळुड़ो ,ममता को झाड़ छे
पोरी आकास की ऊंचाई ,पाताळ की प्यास छे
पोरी चन्दा की लोरी ,माथा की बिंदी ,सोळह-सिङ्गार छे 
पोरी मंदिर को दीयोकळस्या की धार छे  
पोरी सूरज की पयली किरण,जीवन को सार छे
पोरी पल-पल जीवन को आधार छे
  पोरी नी होय तो सुनो घर संसार छे.................................. 

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