पोरी
टेसू फूली नs हुई कुप्पो ,आम्बो भी हुयो घण -घुप्पो
खेत मs लगी रयाज घणा गिलकी, तुरया-तोरी
नs म्हारा गाँव का रंगीला छे धणी-लुगई,पोरया नs पोरी
धणी की साथ लुगाई नी होय तो वात नी बणती
अनs पोरया नs की साथ पोरी नी होय तो वात नी जचती क्योकि –----------
पोरइनs घर की बहार, झाझर की झळकार छे
आँगणा की धुप खिलतो गुलाब छे
कच्ची रोटी को साथ, नानी-सी माय को नानो
दुलार छे
पोरी नी होय तो सुनो घर संसार छे..........................
सुनो छे आँग्णों,
सुनी झांझर- झळकार छे
सुना छे ढोल- नगाड़ा,
सुना व्रत- तिवार छे
सुनो छे नीम- तळय्या,
सुनी घर की सोन-चिरय्या,
सुनो घर-माथा को भाल छे
सुनो घर को चूलो-चवको,
सुनो घर को कोनो-कोनो
सुनी पाती-मनुहार छे
पोरी नी होय तो सुनो घर-संसार छे................................
पोरी सीता-सावित्री, गंगा सी नार छे
पोरी गोदी को बाळुड़ो ,ममता को झाड़ छे
पोरी आकास की ऊंचाई ,पाताळ की प्यास छे
पोरी चन्दा की लोरी ,माथा की बिंदी ,सोळह-सिङ्गार
छे
पोरी मंदिर को दीयो, कळस्या की धार छे
पोरी सूरज की पयली किरण,जीवन को सार छे
पोरी पल-पल जीवन को आधार छे
पोरी नी होय तो सुनो घर संसार छे..................................
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें