सोमवार, 5 मार्च 2012

होली की घणी- घणी बधाई .

होली का तिवार की तय्यारी न म लागेला होयग तम तो भाई न होणी हाऊ राम राम कऊ ..करो तय्यारी तो तम रंग तो खेलो ..पड़ पाणी को भी जरा ध्यान रक्जो हो क्योकि उधाला की अवाई छे न अवता दिन म पाणी की समस्या नि होय पाणी पूरा उन्धाला पूरी जय बस...नि तो तमख  तोकई नि पण हमारी घणी समस्या हुई जायज पाणी का बिना घर को काम नि चली सक्तो हई तो भली वात या कि सुखा रंग से लेवो मजो न खेलो होली .होली खेलन का पइला तेल सी अवखा सरी प मजेकी मालिस करी लावो ताकि रंग खा धोण म पाणी कम लग .रंग नी छुट तोएक चम्मुच  बेसन  मएक चम्मुच  दही नाह्की लेवा न रंग का उप्पर हल्का हाथ सी रगड़ा न पाणी सी धोई लेवा काको भी रंग होयग निक्ल्डी जायग .माथा माय भी मजेको खोपरा को तेल लगाई लेवा तो अच्छो रयग.ज्यादा चमड़ी प रगड़ा -रगड़ी नी करा नै तो चमड़ी खा नुकसान होयग .बात जरा सी पड़ काम कि छे याद रक्जो हो ..एक वात अउरु..गाड़ी का किट सी,वार्निश से होली मत खेल्जो जरा सा म  डोळा कान म चली जाय तो लेण का देणा पड़ी जाय ,जरा सा म मारा मरी हुई जाय घड़ो दर लगज मारामारी सी ,अगला की  मर्जी होय तोज रंग नाक्जो .होली सद्भावना को तिवार  छे रंग सी आपस को प्यार मजबूत होय  यो ध्यान रक्जो ....तम को ग की  या तो घणी स्याणी वात न करी रईज पड़ भाई न होणी म्हारा सी ज्यादा तम ख मालूम छे पड़ बस जरा सी हेर पड़ी जायज अरु कई नी ...तो तम वात न की हेर राखी न न होली मजे की खेलो हम तो यो कवा की तम ख पावणा- पाई सुद्द कवा होली की घणी- घणी बधाई ...तम बठो हम चल्या ...राम -राम 

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