बुधवार, 27 अगस्त 2014

माटी का गणपती

आज की वात-माटी का गणपति...

राम राम भाई न होणी....
घणा दन म मिल्या....घनो अच्छों लगी रयोज आओ बठा वात विचार करा दुई दिन जाताज गणपति जी की अवाई छेगणपति तो सबज लावागा पर अबरकी बार निरा माटी का लाव्जो हो भाइन होणी प्लास्टर का मत लावजो हो
माटी का गणपति अच्छी तरीका सी विसर्जित हुइ जायज
नद्दी नाडा न मड।न मूर्ति तो घर माय समाय अस्सीज लावा छोटी सी नानी सी तो अच्छी लगज.एका आलावा भी तमसुपारी का गणेश भी होय तो कई भली बात.......
तो "अब की बार माटी का गजानन दरबार"अव तम बठो हम चल्या राम राम


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