आज कि वात- संघर्ष अन समाधन
नवो साल न नवी वात न कई कर....... न इ भाई न होणी वाट न तो छे। … भाई जिनगी तो वाज छे जीणु भी वोज छे समस्या भी वाज छे। .... पण उनका निदान को तरीको। … वो ?....
हा तो यो कवा कि संघर्ष अन समाधन कि बिछावा जाजम नs अव करा आपणी वात। …
जिनगी छे तो समस्या तो रायग पण जा कि जग समस्या छे वा समाधान भी मौजूद रायज बस अपणी उखा प निगा नि पड़ी पाउती हाई क्योकि आपणी पूरी तवज्जो तो समस्या का दुख प ज रयज नs अपण ऊका म ज रड़ता रई जवाज समाधान कि तरफ डोळा नी उघाळी पावता हई। …। तो आज योज कवागा कि समस्या न सी घबरावागा नी बल्कि ऊको समाधान करागा। ……। इनी वात की साथ देवो विदा। .... तम बठो हम चल्या राम राम। ………………………।
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