बुधवार, 8 जनवरी 2014

संघर्ष अन समाधन

आज कि वात- संघर्ष  अन समाधन


राम राम भाई न होणी .... बठो वात  विचार करा। … 

नवो साल न नवी वात  न कई कर....... न इ भाई न होणी  वाट न तो छे। … भाई जिनगी तो वाज छे जीणु  भी वोज छे समस्या भी वाज छे। .... पण उनका निदान को तरीको। … वो ?.... 
हा तो यो कवा कि संघर्ष  अन समाधन कि बिछावा जाजम नs अव करा आपणी  वात। … 
जिनगी छे तो समस्या तो रायग  पण जा कि जग समस्या छे वा समाधान भी मौजूद रायज  बस अपणी   उखा प निगा नि पड़ी  पाउती  हाई  क्योकि आपणी  पूरी तवज्जो तो समस्या का दुख प ज रयज नs  अपण  ऊका म ज रड़ता  रई  जवाज समाधान कि तरफ डोळा नी उघाळी पावता  हई। …। तो आज योज कवागा  कि समस्या न सी घबरावागा नी बल्कि ऊको  समाधान करागा। ……। इनी वात की  साथ देवो विदा। .... तम बठो  हम चल्या  राम राम। ………………………। 

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