बुधवार, 8 अगस्त 2012

नरबदा विकराळ ( विकराल) हुई ......


राम राम भाई न s  होणी नर्बदा माय पुर  आयेली छे .ओख s  दिखी न s  मन म s  जो आयो वो लिखी रईज आज  अपुण या वात विचारा ..........

.नरबदा गुस्सा मs आई ,अव तो तरदान देवो भाई
गन्दा- गन्दा  नाळा मत छोड़ो
 उका पल्ला खs मैळो मत करो भाई .....
नरबदा विकराळ हुई  ......
तमारा करम नसी  माय उदास छे ,
उकी छाती पs अव मत मुंग दळो ,
ओकी ममता खs मत लजाओ भाई
नरबदा विकराळ हुई .........
अपणा करम नs खs  अव सुदारो ,
हाथ मs जळ लई सौगंद खाओ ,
ओका पल्ला ख sउज्ळो राखागा भाई
नरबदा, गुस्सा मs आई........
अपणी आस तिस माय पुरजs
ओकी आत्मा खs क्यों दुखाड़ोज,
ओका पल्ला की लाज राखो.भाई ...
नरबदा आपा मs नि रइ........
नर्बदा गुस्सा म आई  अव तो तरदान देवो भाई..

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