रविवार, 15 जनवरी 2012

makar sankranti

राम राम  आज दिन हुयो मकर संक्रांति को सूरज न बदली अपनी राशी आज से हुया मकर राशी का सूरज देवता .
 .ते आसमान म उड़ती पतंग अन रसोई सी तिल गुड की मीठी खुशबु ...वाट करत करत लार टपक न मडी गई .
निमाड़ी तिल का नाना लड्डू बन्नावज  अन बाटज. मंदर म पूजा न होयज अन सुहागड़ बैइड न आपस म सुहाग की चीज {चूड़ी, बिंदी,बिछिया } ,अरु घर म काम की चीज न भी बाट न लगी ज न बैइड न घर म दूसरी सुहागन न ख बुलावज न उनख कुम कुम -हल्दी माथा प लगावज न न साथ म सुहाग की  चीज देज एक्हज कु कु -हल्दी कयज यो निमाड़ म घन दिन तक चालतो रयज..तो या वात तो बिन्द्द न की भाई होड़ भी खूब पतंग बाजी करजआसमान म तरहतरह की पतंग न उड़ती देखायज उड़ती पतंग न होसलो देज सूरज ख च्छुई लेवा .विषमता नसी निकड़ी न न  अनुकूलता म ढला जिन्दगी म आग बढ़ा पड़ यो तवज होयग जव हम वादी ख मिठो रखागा क्योकि या जुबान छे तो बिंना हड्डी की पंड लड़ाई घडी करावज बत्तीस दात इ का आगअ  कमजोर छे .तो इनी मकर संक्रांति प योज कवा कि-    " गुड तिल खावा अन मिठो मिठो बोला ".......सभई न ख मकर संक्रांति कि खूब खूब शुभकामना न ....तुम बटो  हम चल्या  राम राम ...

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