राम राम आज दिन हुयो मकर संक्रांति को सूरज न बदली अपनी राशी आज से हुया मकर राशी का सूरज देवता .
.ते आसमान म उड़ती पतंग अन रसोई सी तिल गुड की मीठी खुशबु ...वाट करत करत लार टपक न मडी गई .
निमाड़ी तिल का नाना लड्डू बन्नावज अन बाटज. मंदर म पूजा न होयज अन सुहागड़ बैइड न आपस म सुहाग की चीज {चूड़ी, बिंदी,बिछिया } ,अरु घर म काम की चीज न भी बाट न लगी ज न बैइड न घर म दूसरी सुहागन न ख बुलावज न उनख कुम कुम -हल्दी माथा प लगावज न न साथ म सुहाग की चीज देज एक्हज कु कु -हल्दी कयज यो निमाड़ म घन दिन तक चालतो रयज..तो या वात तो बिन्द्द न की भाई होड़ भी खूब पतंग बाजी करजआसमान म तरहतरह की पतंग न उड़ती देखायज उड़ती पतंग न होसलो देज सूरज ख च्छुई लेवा .विषमता नसी निकड़ी न न अनुकूलता म ढला जिन्दगी म आग बढ़ा पड़ यो तवज होयग जव हम वादी ख मिठो रखागा क्योकि या जुबान छे तो बिंना हड्डी की पंड लड़ाई घडी करावज बत्तीस दात इ का आगअ कमजोर छे .तो इनी मकर संक्रांति प योज कवा कि- " गुड तिल खावा अन मिठो मिठो बोला ".......सभई न ख मकर संक्रांति कि खूब खूब शुभकामना न ....तुम बटो हम चल्या राम राम ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें