सोमवार, 28 फ़रवरी 2011

राम राम भई न होड़ी बठा वात विचार करा वात करा रंग न की,  होड़ी(होली) को डाँडो गड़ाई गयो  न होड़ी  आई लागी वात रंग न की कि तम हल्दी सी बड़ाओ पेड़ो (पीलो) रंग न चुकंदर सी लाल , पलास  सी केसरियो न पत्ता न सी लिलो (हरो) मगिथा सी गुलाबी न खालो रंग गुलाल तो तम करो रंग बडान कि तिय्यारी  हम ख देवो विदा पद विदा सी पईल कवा महा शिवरात्रि  कि बधाई  शिव जी गोंरा सी ब्याव कर न ख  राजी हुया न घोड़ी चड्या  गोंरा माता लाड़ी बडई मंगल गीत गवाया ."भुत नाथ न भभूत लगाई लय नंदी कि घोड़ी ,,,बड्या बड्या  रे भोला  जी बड्या दुल्ला ....माता मैना थर थर कॉप कस्सी बयाऊ गौरा....
भाई न होड़ी शंकर जी ख सम्झा न कवा ॐ नम: शिवाय  को उलटो कि- यवाशी  मतलब  यो वशी, नम: को उलटो मन मतलब यो मन वशीभूत होय ॐ याने कि  ब्रह्म याने प्रकृति को पुरो मतलब हुयो -यो हमारो मन प्रकृति म रमेलो रय तो भाई न होड़ी  होड़ी का पैइला शिवरात्रि या ज कई रिज कि प्रकृति का साथ रवा न प्राकृतिक रंग सी  होड़ी(होली) खेला न पर्यावरण ख प्रदुषण सी बाचावा तो अव कवा सभई न ख रामराम तम बठो हम चल्या ...

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