मंगलवार, 1 जून 2010

निमाड़ की कहानी निमाड़ को पुराणिक कल  में अनूप जनपद कहते थे .बाद में निमाड़ कहा गया जहा आज विन्ध और सतपुड़ा है वहा कभी विशाल सागर था लकिन भोगोलिक परिवेर्तानो के कारण शिक्ताषम से बने विंधे शेली के भू भाग उपर उठने लगे और कन्थाफोड़, कन्नोद से राजग्रेह तक एक पर्वतीय श्रंखला का जन्म हुआ जिसमे जीव श्रीश्थी का जन्म हुआ सीप घोघे का बाहुल्य हुआ उत्तरी भुँस्खानन पर दबाव पड़ा ,फिर से पर्वतीय शृंखलाओ का जन्म हुआ पहले बाजीगर से गुजरात के उदयपुर जवागर तक विन्ध्य पर्वतमाला में बलुआ पत्थर ,चुने के पत्थर का उत्थान हुआ और पचमदी से सिवनी मालवा तक गोंडवन शैली के सिताषम पर्वमाला का उदय हुआ इधर भू अस्खानन का दबाव बढता ही गया और तिन विशाल दरारों का nirmad हुआ जिसमे नेमावर से कुक्षी तक सिवनी मालवा से धर्मराय तक और आगे अजन्तामाला का जन्म हुआ दक्षिणी दीप पश्चिम की ओर उठा और सह्याद्री पर्वत बना ,ये सभी लावा से बनी ऊपर आते हुए इन्होने विन्ध्य पर्वत की दक्षिण की समुद्री पट्टी को लावा से भर दिया,दोनों और पर्वत और बीच में निचला प्रदेश बन गया यही निचला बाड़ आगे निमाड़ कहलाया 

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